उसकी गेसुओं से दरकती बूंदे
लीप जाए मेरा मन तो जी लूं
मेरे अश्रु भरे मन की खातिर
नम हो उसका दामन तो जी लूं
उस बिन जीवन वन सा लगता है
वो कर दे वन को आँगन तो जी लूं
उसकी नागिन सी जुल्फों का
मैं बन जाऊ चन्दन तो जी लूं
बरसो से तपती मन की धरा पे
वो बरसे बन के सावन तो जी लूं
बिलखते अन्तेर्मन की पीड़ा का
वो बन जाये संयम तो जी लूं
मेरी बूढी बोझल सी आशा का
वो सौंप दे अपना यौवन तो जी लूं
वेदना की थाती से लिख दी जवानी
उसको हो जाये ये अर्पण तो जी लूं
AVENINDRA
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