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Sunday, March 21, 2010

to jee loon


उसकी गेसुओं से दरकती बूंदे
लीप जाए मेरा मन तो जी लूं
मेरे अश्रु भरे मन की खातिर
नम हो उसका दामन तो जी लूं
उस बिन जीवन वन सा लगता है
वो कर दे वन को आँगन तो जी लूं
उसकी नागिन सी जुल्फों का
मैं बन जाऊ चन्दन तो जी लूं
बरसो से तपती मन की धरा पे
वो बरसे बन के सावन तो जी लूं
बिलखते अन्तेर्मन की पीड़ा का
वो बन जाये संयम तो जी लूं
मेरी बूढी बोझल सी आशा का
वो सौंप दे अपना यौवन तो जी लूं
वेदना की थाती से लिख दी जवानी
उसको हो जाये ये अर्पण तो जी लूं
AVENINDRA

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