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Thursday, March 18, 2010


मन की वीरानियों मैं तेरा ख्याल है या
कोई सूखे पत्तों पे चल रहा है !
ये मेरी आँख छलक आई है या
चाँद मेरे गम से पिघल रहा है !
ये चांदनी पत्तों पे ढल रही है या
तेरी याद का जुगनू चमक रहा है !
ऐ बादल आज जम के बरस जा
किसी के साथ रोने को दिल मचल रहा है 1
मोंत मेरी जिंदगी से अच्छी निकली
वो साथ जनाज़े के मेरे चल रहा है !
aabhaar sahit
avenindra maan

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