welcom to my blog

welcome to my blog



Thursday, February 18, 2010


दिल कि जला के आग बुझाते क्यूँ हो

आये थे मेरे पास तो जाते क्यूँ हो

बेहतर तो था कह देते हमसे इश्क नहीं है

मेरे ख्वाबों को मजबूरियां दिखाते क्यूँ हो

जिस बात ने हमको कहीं का ना छोड़ा

हर वक़्त उसी बात पे आते क्यूँ हो

मौत के रहम ने आज नींद बक्श दी

सोने दो मान को अब जागते क्यूँ हो

No comments:

Post a Comment